भारत की जलवायु और मानसून — ऋतुएँ, जेट स्ट्रीम, वर्षा वितरण
उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु — चार ऋतुएँ, दो मानसून, ITCZ और कोपेन वर्गीकरण
भारत की जलवायु को “उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु” (Tropical Monsoon Climate) कहा जाता है। “मानसून” शब्द अरबी शब्द “मौसिम” (Mausim) से आया है जिसका अर्थ है — ऋतु (Season)। मानसून = हवाओं की दिशा में मौसमी उलटफेर (Seasonal Reversal of Wind Direction)।
भारत बहुत बड़ा और विविध देश है। अक्षांश (Latitude), ऊँचाई (Altitude), हिमालय, समुद्र से दूरी, जेट स्ट्रीम (Jet Streams), और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) जैसे कारक अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु को अलग बनाते हैं।
पश्चिमी राजस्थान में गर्मियों में तापमान 50°C तक पहुँच सकता है, जबकि लेह (लद्दाख) में सर्दियों में -45°C तक गिर सकता है। मेघालय में सालाना 1,100+ सेमी बारिश होती है, जबकि राजस्थान में 10 सेमी से भी कम!
चरण 1 — विभेदी तापन: गर्मियों में भारतीय उपमहाद्वीप (~45°C) हिंद महासागर (~28°C) से बहुत ज़्यादा गर्म होता है। भूमि पर तीव्र निम्न दाब बनता है।
चरण 2 — ITCZ का खिसकना: ITCZ (अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) गर्मियों में भूमध्य रेखा से उत्तर की ओर खिसकता है, जुलाई तक गंगा के मैदान तक पहुँचता है। यह नम हवाओं को भारत की ओर खींचता है।
चरण 3 — जेट स्ट्रीम का खिसकना: उपोष्ण पश्चिमी जेट (Sub-Tropical Westerly Jet) जो सर्दियों में हिमालय के दक्षिण बहती है, गर्मियों में हिमालय के उत्तर चली जाती है। इसकी जगह उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट (Tropical Easterly Jet) आती है — यही मानसून के प्रवेश (Onset) का संकेत है।
चरण 4 — व्यापारिक हवाओं का मुड़ना: दक्षिणी गोलार्ध की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ (SE Trade Winds) भूमध्य रेखा पार कर भारत में दक्षिण-पश्चिमी (SW) हवाओं में बदल जाती हैं — ये हैं मानसूनी हवाएँ।
| तिथि (अनुमानित) | मानसून का आगमन |
|---|---|
| 25 मई | अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह |
| 1 जून | केरल (मालाबार तट) — “मानसून का प्रवेश” (Onset) |
| 10 जून | मुंबई |
| 15 जून | कोलकाता |
| 29 जून – 1 जुलाई | दिल्ली |
| जुलाई पहला सप्ताह | पूरा भारत मानसून से आच्छादित |
| मध्य सितंबर | उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी (Withdrawal) शुरू |
| 5 अक्टूबर | मुंबई से वापसी |
| मध्य दिसंबर | दक्षिण-पूर्वी तट (तमिलनाडु) से पूर्ण वापसी |
| वर्षा क्षेत्र | वार्षिक वर्षा | क्षेत्र / उदाहरण |
|---|---|---|
| अत्यधिक वर्षा | 200 सेमी से अधिक | पश्चिमी घाट का पवनाभिमुख, पूर्वोत्तर (मेघालय, असम), अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप |
| अधिक वर्षा | 100-200 सेमी | पश्चिमी घाट का पूर्वी ढाल, उत्तरी मैदान का अधिकांश भाग, ओडिशा, मध्य प्रदेश |
| मध्यम वर्षा | 50-100 सेमी | दक्कन पठार, गुजरात, हरियाणा, पंजाब का अधिकांश भाग |
| कम वर्षा | 50 सेमी से कम | पश्चिमी राजस्थान (थार रेगिस्तान), कच्छ, लद्दाख, पश्चिमी घाट का वृष्टि छाया क्षेत्र |
व्लादिमीर कोपेन (Wladimir Koppen) ने तापमान और वर्षा के आधार पर विश्व की जलवायु को 5 मुख्य समूहों (A, B, C, D, E) में बाँटा। भारत में 6 प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं:
| कोड | जलवायु प्रकार | विशेषताएँ | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| Am | उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) | भारी वर्षा, छोटा शुष्क मौसम | पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर, अंडमान |
| Aw | उष्णकटिबंधीय सवाना (Tropical Savanna) | गर्म, स्पष्ट शुष्क सर्दी | अधिकांश प्रायद्वीपीय भारत |
| BSh | अर्धशुष्क स्टेपी (Semi-arid Steppe) | कम वर्षा, गर्म | राजस्थान, गुजरात, हरियाणा का कुछ भाग |
| BWh | गर्म मरुस्थलीय (Hot Desert) | बहुत कम वर्षा, चरम तापमान | थार रेगिस्तान (पश्चिमी राजस्थान) |
| Cwa | आर्द्र उपोष्ण (Humid Subtropical) | गर्म गर्मी, शुष्क सर्दी, मानसूनी वर्षा | उत्तर भारत का मैदानी क्षेत्र (दिल्ली, लखनऊ) |
| Dfc/H | शीत/पर्वतीय (Cold/Mountain) | ठंडी सर्दियाँ, बर्फ़बारी | हिमालय, लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल |
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